फतेहपुर कलेक्ट्रेट चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट।
एम एम सिद्दीकी खास रिपोर्ट ।
●बिना सुविधा के नहीं होते काम, कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में बैठे कर्मचारी वकीलों और पत्रकारों से करते अभद्रता।
●फतेहपुर जिला अधिकारी के अंतर्गत आने वाली खागा तहसील में नकल आवेदन के लिए दौड़ाया जाता है।
●महिला कर्मचारी को सुविधा शुल्क न दो तो कागजों को बता देती है नकली।
●अभद्रता का झूठा आरोप लगा जेल भेजने की देती है धमकी।
फतेहपुर: फतेहपुर का कलेक्ट्रेट अव्यवस्थाओं व भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। यहां पर बिना सुविधा शुल्क के कोई कार्य करना मुश्किल है। कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में तैनात कर्मचारी वकीलों व पत्रकारों तक को नहीं छोड़ते हैं। उनके साथ अभद्रता करते हैं। बात-बात पर लड़ाई को उतारू हो जाते हैं। काम करने की बजाय सीधे सुविधा शुल्क देने की बात करते हैं। सुविधा शुल्क न देने पर काम भी नहीं करते हैं। कर्मचारी के बीच एकजुटता होने की वजह से कोई उनका कुछ बिगाड़ में नहीं पता है। इससे कलेक्ट्रेट की छवि खराब हो रही है। जिलाधिकारी स्तर पर भी कार्रवाई न होने से प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं । दूसरी तरफ खागा तहसील का तो और भी बुरा हाल है। यहां तैनात उमा देवी नाम की महिला कर्मचारी खुद को सूबे का मुखिया समझती है। वह हर काम के बदले रुपयों की पेशकश करती है। रुपया ना देने पर कागजात को ही नकली बता कर फेंक देती है।कई बार महिला की शिकायत भी हो चुकी है लेकिन उसके हौसले इतने बुलंद है कि वह पत्रकारों और वकीलों तक को नहीं छोड़ती है। उनसे भी अभद्रता करती है। जब कोई वकील या पत्रकार जिलाधिकारी से शिकायत की चेतावनी देता है तो सीधे कह देती है कि कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ज्यादा बात बिगड़ने पर वह महिलाओं की उत्पीड़न की बात कर रिपोर्ट लिखाने
की धमकी देती है ।इसकी वजह से लोग परेशान हैं
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सुबह होते ही खागा तहसील में माफिया का जमावड़ा।
सुबह से ही खागा तहसीलदार के कार्यालय में दाखिल खारिज को लेकर खेल शुरू हो जाता है।यहां भू माफिया का जमावड़ा लगा रहता है। भू माफिया कर्मचारियों की मिली भगत से भूमियों पर खारिज की गई फाइलों को रिस्टोर कराकर एक ही दिन में फैसला करवा लेते हैं ।उसे भू स्वामी को कोई कार्रवाई करने की मौका ही नहीं मिल पाता है। कई लोगों की भूमि इसी तरह वह माफिया अपने में कब्जे में लेकर बेच चुके हैं
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सरकार संजीदा लेकिन अधिकारी कर रहे उत्पीड़न किसानों और भू स्वामियों के लिए सरकार संजीदा है। वह उनके लिए कार्य कर रही है। वहीं दूसरी तरफ अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं। वह किसानों व भू स्वामियों के हितों की अनदेखी करते हुए उनको लूट रहे हैं। किसानों को स्वामियों को नुकसान उठाना पड़ता है
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खागा का पुराना बस स्टैंड लेखपालों की सांठ गांठ का अड्डा ।
खागा का पुराना बस स्टैंड कर्मचारियों व भू माफिया की सांठ गांठ का अड्डा बन गया है। यहां पर लेखपाल भू माफिया के साथ मिलकर लोगों के अधिकारों पर डाका डालने का काम करते हैं।

